BHEL Q1 net loss ने झटका दिया निवेशकों को, पहली तिमाही में घाटा दोगुना
भारत की प्रमुख महारत्न सार्वजनिक उपक्रम कंपनी BHEL (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) की पहली तिमाही की वित्तीय रिपोर्ट ने निवेशकों को चौंका दिया है। BHEL Q1 net loss ₹455.5 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है। FY25 की पहली तिमाही में कंपनी का नेट लॉस ₹211.4 करोड़ था।
यह घाटा न सिर्फ कंपनी के संचालन पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि निवेशकों के लिए भी सतर्क होने का संकेत देता है। कंपनी के शेयरों ने इस खबर के बाद तीव्र गिरावट दिखाई और 5% तक लुढ़क गए।

BHEL की पहली तिमाही की प्रमुख बातें
कुल राजस्व:
FY26 की पहली तिमाही में कंपनी का कुल राजस्व ₹5,486.9 करोड़ रहा, जो लगभग पिछले वर्ष के ₹5,484.9 करोड़ के बराबर है। यानी राजस्व में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।
EBITDA और मार्जिन:
कंपनी का EBITDA नकारात्मक में रहा। EBITDA मार्जिन –9.8% पर दर्ज किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह –3.1% था। इसका मुख्य कारण कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और उत्पादन लागत में इजाफा है।
खर्च में वृद्धि:
कंपनी के कुल खर्च में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। कच्चे माल, श्रम लागत और ऑपरेशनल खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी हुई, जिससे कंपनी की प्रोफिटेबिलिटी पर सीधा असर पड़ा।
BHEL Q1 net loss की बड़ी वजह – पावर सेगमेंट में गिरावट
BHEL की आमदनी का एक बड़ा हिस्सा Power सेगमेंट से आता है, लेकिन इस तिमाही में इस क्षेत्र से आय स्थिर रही। Power सेगमेंट की आय ₹3,898.9 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में कोई खास बढ़ोतरी नहीं दर्शाती। इसका एक कारण मानसून के दौरान पावर प्रोजेक्ट्स की धीमी प्रगति और डिमांड में गिरावट को माना जा रहा है। इसके साथ ही, कई प्रोजेक्ट्स में डिले होने के कारण भी राजस्व प्रभावित हुआ।
भारी बकाया और डेब्ट – कंपनी के लिए चिंता का विषय
BHEL net loss के पीछे एक और बड़ी वजह कंपनी की लंबित भुगतानियों और डेब्ट की स्थिति है।
• एक सरकारी परियोजना STPG से ₹211 करोड़ की राशि अब तक लंबित है।
• राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) की परियोजना से भी लगभग ₹185 करोड़ बकाया हैं। इनमें से ₹90 करोड़ FY26 की पहली तिमाही में प्राप्त हुए हैं, लेकिन शेष राशि पर अनिश्चितता बनी हुई है। यह बकाया राशि कंपनी की नकदी प्रवाह को प्रभावित कर रही है और इसका प्रभाव संचालन क्षमता पर भी पड़ रहा है।

शेयर बाजार में प्रतिक्रिया – निवेशकों में घबराहट
BHEL Q1 net loss की खबर जैसे ही सामने आई, कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली।
• शेयर की कीमत ₹239.65 से गिरकर ₹228.30 तक आ गई, जो कि लगभग 5% की गिरावट है।
• बीते दो कारोबारी सत्रों में कंपनी के शेयरों में कुल मिलाकर 8% तक की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों की चिंता इस बात को लेकर है कि क्या आने वाली तिमाहियों में कंपनी इस घाटे से उबर पाएगी या नहीं।
एक्सपर्ट्स की राय – क्या करें निवेशक?
सकारात्मक पक्ष:
कुछ ब्रोकरेज फर्म्स और संस्थागत निवेशकों का मानना है कि BHEL के पास मजबूत ऑर्डर बुक है, और निकट भविष्य में इसके चलते कंपनी की स्थिति में सुधार हो सकता है।
• कुछ एक्सपर्ट्स ने BHEL पर “Buy” रेटिंग बनाए रखी है और ₹335 तक का टारगेट प्राइस सुझाया है।
• उनका मानना है कि कंपनी के पास लगभग ₹2.04 ट्रिलियन का ऑर्डर बैकलॉग है, जो FY25 के सेल्स का लगभग 7.2 गुना है।
यह दर्शाता है कि कंपनी के पास पर्याप्त प्रोजेक्ट्स हैं जो आगे चलकर राजस्व ला सकते हैं।
नकारात्मक पक्ष:
टेक्निकल विश्लेषकों का मानना है कि यदि शेयर ₹240 के ऊपर मजबूती से नहीं टिक पाता, तो इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है। कुछ एनालिस्ट्स का यह भी कहना है कि अगर बाजार में कमजोरी बनी रही, तो शेयर ₹199–₹190 तक फिसल सकता है।
क्या कहती है BHEL की ऑर्डर बुक?
हालांकि BHEL Q1 net loss ने सबको चौंकाया है, लेकिन कंपनी की ऑर्डर बुक अभी भी मजबूत मानी जा रही है:
• FY26 की पहली तिमाही में कंपनी को ₹13,445 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं, जिनमें ₹7,620 करोड़ Power सेगमेंट से और ₹5,825 करोड़ Industry सेगमेंट से जुड़े हैं।
• कुल बैकलॉग ₹2.04 ट्रिलियन से ज्यादा का है, जो यह संकेत देता है कि कंपनी के पास काम की कोई कमी नहीं है।
इसलिए, अगर कंपनी प्रोजेक्ट एक्सीक्यूशन में तेजी लाती है, तो आने वाली तिमाहियों में प्रदर्शन सुधर सकता है।
निवेशकों के लिए रणनीति – क्या करें?
शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए:
• यदि शेयर ₹240 से ऊपर क्लोज होता है, तो एक छोटी अवधि का रिवर्सल संभव है।
• यदि यह स्तर टूटता है, तो ₹199 तक की गिरावट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए:
• कंपनी की ऑर्डर बुक और रणनीतिक सरकारी प्रोजेक्ट्स पर निर्भरता इसके फंडामेंटल्स को मजबूत बनाती है।
• यदि आप दीर्घकालिक निवेशक हैं और अस्थिरता को झेल सकते हैं, तो यह स्टॉक आपके पोर्टफोलियो में जगह बना सकता है।
मैनेजमेंट की प्रतिक्रिया
कंपनी के मैनेजमेंट ने यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा घाटे का मुख्य कारण प्रोजेक्ट्स में देरी, लागत में वृद्धि और कैश फ्लो से जुड़ी दिक्कतें रही हैं।
उन्होंने भरोसा दिलाया है कि कंपनी जल्द ही प्रोजेक्ट एक्सीक्यूशन पर ध्यान केंद्रित करेगी और खर्चों को नियंत्रण में लाकर भविष्य की तिमाहियों में सकारात्मक परिणाम देगी।

क्या कहती है बाजार की भाषा?
BHEL का शेयर बाजार में एक समय में निवेशकों के भरोसे का प्रतीक माना जाता था। लेकिन BHEL Q1 ने यह दिखाया है कि पारंपरिक पीएसयू कंपनियों को भी समय के साथ खुद को बदलना होगा।
आज की स्थिति में निवेशकों को दो बातों का मूल्यांकन करना चाहिए:
1. क्या कंपनी के पास आने वाले समय में लाभ में लौटने की ठोस योजना है?
2. क्या कंपनी की ऑर्डर बुक और रणनीति उस योजना को समर्थन दे रही है?
निष्कर्ष
BHEL Q1 net loss ₹455 करोड़ पर पहुंचना केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह निवेशकों, नीति निर्माताओं और प्रबंधन के लिए चेतावनी है। यह घाटा कंपनी के संचालन में मौजूद समस्याओं की ओर इशारा करता है।
हालांकि कंपनी की ऑर्डर बुक मजबूत है, लेकिन जब तक प्रोजेक्ट्स की समय पर डिलीवरी और खर्चों पर नियंत्रण नहीं आता, तब तक निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को तकनीकी स्तरों का ध्यान रखना चाहिए, जबकि लॉन्ग टर्म निवेशक कंपनी की रणनीति और ऑर्डर फुलफिलमेंट ट्रैक को नज़र में रखें।
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