Meghnad Desai का निधन: मोदी की संवेदना और उनके योगदान की चर्चा

Meghnad Desai का निधन – सिद्धांतवादी अर्थशास्त्री हम सब से विदा

आज मंगलवार, Meghnad Desai का इंतकाल हो गया। वे 85 वर्ष के थे और ब्रिटिश हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य तथा प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री थे। Prime Minister Narendra Modi ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

Meghnad Desai

 

Meghnad Desai कौन थे – जीवन परिचय और उपलब्धियाँ

Meghnad Desai का जन्म 10 जुलाई 1940 को गुजरात के वडोदरा में हुआ था। इन्होंने University of Bombay से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढाई पूरी की और फिर University of Pennsylvania से 1963 में PhD हासिल की।

उन्होंने 1965 से 2003 तक London School of Economics (LSE) में अर्थशास्त्र पढ़ाया तथा Emeritus Professor के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने Global Governance अध्ययन के लिए LSE में Centre for the Study of Global Governance की स्थापना की थी। वे Marxian economics, inequality, famine, political economy और globalization पर विशिष्ट योगदान देने वाले विद्वान थे।

 

मेधनाद देसाई के लेखक और अकादमिक योगदान

Meghnad Desai ने 200 से अधिक अकादमिक लेख तथा कई पुस्तकें लिखीं। इनमें ‘Marx’s Revenge’, ‘Nehru’s Hero’, ‘Development and Nationhood’, ‘Rethinking Islamism’ और उपन्यास ‘Dead on Time’ शामिल हैं। वे British और भारतीय प्रतिष्ठित अख़बारों जैसे Guardian, Indian Express, Business Standard में नियमित रूप से columnas लिखते रहे।

उनकी दृष्टि व्यापक थी – अर्थव्यवस्था, राजनीति, समाज और इतिहास के बीच की कड़ी को स्पष्ट करते हुए, उन्होंने South Asia और यूरोप के आर्थिक विकास पर भी लिखा।

Meghnad Desai

PM मोदी की संवेदनाएँ – एक भारतीय विचारक को श्रद्धांजलि

Prime Minister Narendra Modi ने X (पूर्व Twitter) पर लिखा:

Anguished by the passing away of Shri Meghnad Desai Ji, a distinguished thinker, writer and economist. He always remained connected to India and Indian culture. He also played a role in deepening India‑UK ties…”।

मोदी ने याद किया कि Desai जी ने भारत से जुड़े रहकर इंडिया‑यूके रिश्तों को मजबूत बनाया और उनकी चर्चाएँ और विचार साझाएँ सदैव स्मरणीय रहेंगी।

अन्य नेताओं और बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रियाएँ

संजय सांयाल (Prime Minister Economic Advisory Council सदस्य) ने कहा:

“Very sorry to hear that eminent economist Meghnad Desai has passed away… always cheerful and open to new ideas…” और Manish Sisodia ने उन्हें “towering intellectual” कहा, जिन्होंने बहस और विद्वता के साथ सीमाओं को चुनौती दी ।

 

Meghnad Desai की वैश्विक भूमिका और प्रभाव

Meghnad Desai ने Labour Party में सक्रिय भूमिका निभाई – 1991 में उन्हें House of Lords में Baron Desai ऑफ St Clement Danes बनाया गया था।

हालांकि 2020 में उन्होंने Labour Party से इस्तीफा दे दिया था, उन्होंने असंतोष व्यक्त किया था कि पार्टी जातीय या धार्मिक भेदभाव के मामलों में समुचित कार्रवाई नहीं कर पाई थी।

वे LSE में Centre for the Study of Global Governance के संस्थापक थे और उन्होंने वैश्विक नीति और शासन के मॉडल पर शोध कार्य किया।

 

Meghnad Desai की विरासत – विचार, शिक्षा और प्रेरणा

Meghnad Desai की विरासत अनेक क्षेत्रों में अमिट है:

• Academic: उन्होंने वडोदरा, मुंबई, पेंसिल्वेनिया से लेकर LSE तक ज्ञान की यात्रा तय की।

• लेखक: उन्होंने विचारों को किताबों में पिरोया; Marxian critique से लेकर राजनीतिक थ्रिलर तक।

• सार्वजनिक बुद्धिजीवी: वे नई आर्थिक विचारधाराओं एवं लोकतांत्रिक विमर्श में प्रभावशाली रूप से शामिल रहे।

• India‑UK संबंधों में सेतु: उनकी दृष्टि से दोनों देशों के विचार आदान‑प्रदान में योगदान हुआ।

उनकी बहुआयामी पहचान ने उन्हें एक वैश्विक बुद्धिजीवि के रूप में स्थापित किया।

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Meghnad Desai का निधन: अंतिम विचार

Meghnad Desai का निधन एक युग का अंत है जहां एक आदर्शवादी अर्थशास्त्री, लेखक, विचारक और सेतुकर्ता युवा और बुजुर्ग दोनों को प्रेरित करते रहे।

प्रधानमंत्री मोदी की संवेदना, नेताओं की श्रद्धांजलि और राष्ट्र-विदेश में श्रद्धांजलि भाव से स्पष्ट है कि उन्होंने सिर्फ एक विद्वान न होकर मानवता, संस्कृति और विचारों का संकीर्ण दायरा भी बढ़ाया।

उनकी लिखी किताबें, सैकड़ों लेख और जन‑संवाद आज भी प्रेरणा स्रोत हैं। उनके विचारों का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों में भी जीवित रहेगा।

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